भाषा और साहित्य में सम्बन्ध एवं अंतर: जानिए साहित्य क्या होता है?

भाषा और साहित्य का सम्बन्ध अभिन्न है. क्योंकि भाषा के अभाव में साहित्य का कोई अस्तित्व नहीं होता. भाषा और साहित्य एक दुसरे के पूरक है. विभिन्न कालों में भाषा के विभिन्न रूपों के दर्शन हमें साहित्य में ही होते हैं. भाषा जीवित हो अथवा मृत, उसका अध्ययन हम उस भाषा के साहित्य के आधार पर ही करते हैं. तो आज हम आपसे भाषा और साहित्य में सम्बन्ध के बारे में बात करेंगे.

भाषा क्या है.

भाषा विचारों, भावों के आदान-प्रदान का एक माध्यम है. भाषा के द्वारा हम अपनी भावों, विचारों को दुसरे तक पहुंचाते हैं. यह भावों के विचार-विनिमय का साधन है. भाषा के बिना मनुष्य ‘पशु’ के समान है, भाषा के कारण ही मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है. भाषा का आविष्कार व विकास मनुष्य का विकास है. मनुष्य के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में भाषा का अत्यंत महत्त्व है.

साहित्य क्या है?

किसी भाषा के वाचिक और लिखित को साहित्य कह सकते हैं. दुनिया में सबसे पुराना वाचिक साहित्य आदिवासी भाषाओं में मिलता है. इस दृष्टि से आदिवासी साहित्य सभी साहित्यों का मूल स्रोत है. साहित्य शब्द  स+हित+य के योग से बना है. साधारण भाषा में कहा जाए तो, साहित्य समाज का एक आईना है, जिसमें हम समाज को देखते हैं  अर्थात् यह मानवीय जीवन का चित्र होता है.

भाषा और साहित्य में सम्बन्ध 

राबर्ट लाडो के शब्दों में, “कोई भी व्यक्ति भाषा के गठन में एकदम साहित्य की ओर बिना भाषा के मूल सांस्कृतिक पक्ष को समझे छलांग नहीं लगा सकता. क्योंकि साहित्य भाषा के माध्यम से ही अभिव्यक्त होता है, इसलिए बिना भाषा को समझे, शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को बिना समझे किसी की साहित्यिक कृति को नहीं समझा जा सकता है.”

  • भाषा और साहित्य एक दुसरे के पूरक हैं. विभिन्न कालों में भाषा के विभिन्न रूपों के दर्शन हमें साहित्य में ही होते हैं. भाषा जीवित हो अथवा मृत, उसका अध्ययन हम उस भाषा के साहित्य के आधार पर ही करते हैं.
  • साहित्य के द्वारा हम जीवित भाषा की सजीवता व उसके उत्कर्ष से परिचित होते हैं. साहित्य के द्वारा ही हम जीवित भाषा के शब्दों की शक्ति से अवगत होते हैं.
  • भाषा और साहित्य दोनों का सम्बन्ध समाज से है. भाषा समाज में ही उत्पन्न होती है एवं समाज में ही उसका पालन-पोषण होता है, उसका रूप समाज में ही निखरता है. उसको जीवन शक्ति समाज से ही प्राप्त होती है.
  • समाज के विकास के साथ-साथ भाषा की क्षमताएं भी विकसित हो जाती है, नए-नए शब्दों, मुहावरों, सूक्तियों, लोकोक्तियों का प्रवेश होता है और वह नवीनतम एवं सूक्ष्मतम भावों और विचारों को व्यक्त करने में समर्थ होती है.
  • उत्तम एवं समृद्ध साहित्य में भाषा समृद्ध होती है. अत: भाषा और साहित्य दोनों का सम्बन्ध सामाजिक वातावरण से है. भाषा और साहित्य दोनों का कार्यक्षेत्र एक है, इसलिए दोनों का घनिष्ठ सम्बन्ध होना स्वाभाविक है.
  • भाषा पर पूर्ण अधिकार साहित्य के अध्ययन के बिना असंभव है. भाषा पर पूर्ण अधिकार प्राप्त करने के लिए साहित्य का गहन अध्ययन करना अनिवार्य है. साहित्य में हमें भाषा की विभिन्न शैलियों के दर्शन होते हैं.
  • शब्दों, मुहावरों, सूक्तियों तथा लोकोक्तियों के विभिन्न प्रयोगों के दर्शन हमें साहित्य में ही होते हैं. साहित्य के अध्ययन के द्वारा ही प्रत्येक की अभिव्यक्ति सहज एवं उत्तम विकास संभव है.

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