शिक्षा का अधिकार पर निबंध: Right to Education Meaning in Hindi

भारत को अक्सर एक गरीब देश के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यहाँ पर अधिकतम देशवासी काफ़ी गरीब हैं। वैसे तो गरीबी के कई कारण होते हैं, लेकिन अशिक्षा भी एक काफ़ी बड़ा कारण है। इसी को देखते हुए सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में पारित किया, जिससे सभी बच्चों को पढ़ाई करने का मौक़ा मिल सके। Right To Education (RTE) Meaning in Hindi के बारे में आज हम विस्तार से बात करेंगे कि इससे देश में शिक्षा के माध्यम से कैसे लाभ हो रहा है?

शिक्षा का अधिकार पर निबंध

हमारे देश में करोड़ों बच्चे गरीबी के कारण पढ़-लिख नहीं पाते। स्कूल जाने की उम्र में स्कूल का मुँह नहीं देख पाते। ये बच्चे ख़ासकर गाँवों व शहरों की मलिन बस्तियों में रहते हैं। अनाथ, असहाय, दलित व उपेक्षित हैं।

पढ़ने-लिखने की उम्र में ही इन्हें किसी-न-किसी काम में लगा दिया जाता है। इन्हें मज़दूरी करनी पड़ती है। इनमें से अधिकांश बच्चे बुरी संगत में पड़कर गंदी आदतों का शिकार हो जाते हैं। इसकी वजह से न तो उनके परिवार का ठीक से विकास हो पाता है, न देश का। विकास के लिए शिक्षा बहुत जरुरी है।

आजादी के बाद देश में सुधार के लिए अनेक योजनाएँ चलाईं गईं। इन योजनाओं के बावजूद परिस्थितियों में खास सुधार नहीं आया। अनपढ़ों की बढ़ती तादाद देश के सामने चुनौती बनकर खड़ी है। इन चुनौती से निबटने के लिए सरकार ने ‘शिक्षा का अधिकार‘ कानून बनाया है।

इसके द्वारा देश के सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से बेहतर एवं निःशुल्क शिक्षा मुहैया कराई जाएगी। शिक्षा का अधिकार विधेयक सन 2009 में सांसद में पास किया गया। इसके लागू होने के बाद देश के प्रत्येक बच्चे को शिक्षित बनाने की राह खुल गई है। यह कानून उन बच्चों के लिए वरदान है, जो गरीबी के कारण विद्यालय का मुँह नहीं देख पाते।

शिक्षा का अधिकार क्या है?

शिक्षा का अधिकार वह मौलिक अधिकार है, जो प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इसे निःशुल्क एवं ‘अनिवार्य बाल-शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009’ के नाम से जाना जाता है। यह अधिनियम 1 अप्रैल, 2009 से पूरे देश में लागू किया गया।

  • 6-14 वर्ष के बच्चों को हर हाल में 8वीं तक की निःशुल्क दी जाएगी। शारीरिक और मानसिक रूप से अशक्त बच्चों के लिए उम्र की सीमा 18 वर्ष होगी।
  • निःशुल्क शिक्षा का मतलब है कि शिक्षा पाने के लिए किसी प्रकार की फ़ीस अथवा खर्च का भुगतान नहीं करना होगा।
  • सरकारी स्कूलों में हर बच्चे को कॉपी-किताबें, बसता, ड्रेस और दोपहर का भोजन मुफ़्त दिया जाएगा।
  • सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी, नवोदय, केंद्रीय और सैनिक स्कूलों में हर बच्चे को प्रवेश लेने का अधिकार है।
  • प्राइवेट स्कूलों को भी समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को कम-से-कम 25 फ़ीसदी दाख़िला देना होगा। इन बच्चों को अन्य सभी बच्चों के साथ ही बिठाकर पढ़ाना होगा।
  • टी.सी., जन्म प्रमाणपत्र अथवा अन्य किसी प्रकार के कागज के न होने पर कोई स्कूल बच्चे को दाख़िला देने से मना नहीं कर सकता। 
  • कोई भी व्यक्ति बिना सरकारी मान्यता के स्कूल नहीं चला सकता। ऐसा करना दंडनीय अपराध है। इसके लिए एक लाख रुपए जुर्माना हो सकता है।
  • कोई स्कूल दाख़िले के लिए किसी बच्चे का टेस्ट या उसके अभिभावक का इंटरव्यू नहीं ले सकता।
  • कोई स्कूल बच्चे के दाख़िले के लिए चंदा अथवा किसी भी रूप में पैसे की माँग नहीं कर सकता।

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शिक्षा का अधिकार अधिनियम कब लागू हुआ?

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 1 अप्रैल, 2009 को लागू हुआ, जिससे 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था है। यह कानून सत्यापित करती है कि सभी का हक़ है कि उन्हें पूरी शिक्षा मिले, चाहे उसकी स्थिति कैसी भी हो।

नि:शुल्‍क शिक्षा‘ का तात्‍पर्य यह है कि किसी बच्‍चे जिसको उसके माता-पिता द्वारा स्‍कूल में दाखिल किया गया है, को छोड़कर कोई बच्‍चा, जो उचित सरकार द्वारा समर्थित नहीं है, किसी किस्‍म की फीस या प्रभार या व्‍यय जो प्रारंभिक शिक्षा जारी रखने और पूरा करने से उसको रोके अदा करने के लिए उत्‍तरदायी नहीं होगा। इसके तहत ‘सर्व शिक्षा अभियान’ के जैसे कई तरह के शैक्षिक कार्यक्रम संचालित किए गए हैं।

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