चलचित्र क्या होता है? चलचित्र के लाभ: चलचित्र के प्रकार

वर्त्तमान समय में चलचित्र का प्रयोग सभी क्षेत्रों में हो रहा है. क्योंकि इसके माध्यम से किसी विषय को देखने के साथ-साथ आप सुन भी सकते हैं. इसका प्रयोग अध्यापन कार्य के साथ ही मनोरंजन आदि में भी किया जाता है. शिक्षा के क्षेत्र में चलचित्र काफी महत्त्व रखता है, क्योंकि यह कम समय में छात्रों को अधिक ज्ञान देता और इसके प्रयोग से पाठ में नीरसता नहीं आती. तो आज मैं आपसे चलचित्र का अर्थ, चलचित्र के लाभ के बारे में बात करेंगे.

चलचित्र क्या होता है?

चलचित्र का मतलब सिनेमा (Cinema) होता है. यह एक यांत्रिक यंत्र होता है, जो गतिशील चित्रों अर्थात् चलचित्रों को पर्दे पर दिखाता है. चलचित्र के माध्यम से किसी विषय को देखने के साथ-साथ सुन भी सकते हैं. इसका प्रयोग शिक्षण कार्य के अलावे मनोरंजन आदि में भी किया जाता है.

क्रो तथा क्रो के अनुसार, “चलचित्र शैक्षिक महत्त्व रखते हैं, क्योंकि ये गति का विस्तार से वर्णन करते हैं, विचार एवं कार्य की निरंतरता विकसित करते हैं और वास्तविक होते हैं. ये मनुष्य के नेत्रों के पूरक हैं और अपने प्रस्तुतीकरण में समरूप हैं.”

चलचित्र के प्रकार 

सूचनात्मक फिल्म- इनका प्रयोग छात्रों को नवीन तथ्यों की सूचना देने के लिए किया जाता है.

भावनात्मक फिल्म- इनका उद्देश्य छात्रों की भावना तथा सहानुभूति को जागृत करना है.

शिक्षात्मक फिल्म- इनका उद्देश्य छात्रों को सही ज्ञान प्रदान करना है.

चलचित्र के लाभ

  • चलचित्र पदार्थों में गति लाता है.
  • ये छात्रों का ध्यान विषय पर केन्द्रित रखने में सहायक होते हैं, क्योंकि छात्र चलचित्र देखने में रूचि लेते हैं.
  • यह तथ्यों तथा विगत की घटनाओं का सही चित्र प्रस्तुत करता है.
  • चलचित्र कम समय में छात्रों को अधिक ज्ञान प्रदान करता है.
  • चलचित्र यानि सिनेमा के उपयोग से पाठ में नीरसता नहीं आती है, इससे बच्चे पाठ में रूचि लेते हैं.
  • ये छात्रों की मानसिक शक्तियों का विकास करने में भी सहायक है.

चलचित्र की सीमाएं

  • शिक्षण में चलचित्रों का प्रयोग अधिक महंगा पड़ता है.
  • फिल्में प्राप्त करना भी कठिन कार्य है, क्योंकि सभी को चलचित्र प्रयोग करना नहीं आता.
  • सभी जीव विज्ञान के शिक्षक चलचित्रों का प्रयोग करना नहीं जानते हैं.

चलचित्र  के प्रयोग में सावधानी

  • जिस प्रकरण की फिल्म दिखानी है उसके बारे में पहले से ही जानकारी दे देनी चाहिए.
  • कक्षा में ऐसी फिल्मों को नहीं दिखाना चाहिए जो शैक्षणिक उद्देश्यों की पूर्ति न करती हो.
  • फिल्म दिखाने के बाद छात्रों से मौखिक प्रश्न पूछकर प्राप्त ज्ञान की जाँच कर लेनी चाहिए.

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