औपचारिक और अनौपचारिक पत्र लेखन: Hindi Letter Writing Tips

आज के समय के बच्चे तो पैदा ही Whatsapp और social media पर हो रहे हैं, उन्हें क्या पता कि पत्र-लेखन क्या है? वे तो सेकंड में ही लोगों से online chatting कर लेते हैं। पहले के समय में पत्र पहुँचने में 2-3 सप्ताह लग जाता था, और उधर से प्रतिक्रिया की बात ही मत कीजिए। Digitisation के इस दौर में भी कई जगहों पर हस्तलिखित पत्र या computer-printed letters चलती हैं, तो चलिए आज Hindi letter writing tips के बारे में जान लेते हैं।

वर्तमान में जैसे इंटरनेट चलाना एक जरुरत है, पहले के समय में पत्र-लेखन भी एक अद्भुत कला हुआ करती थी। परस्पर संबंधों की अभिव्यक्ति पत्र के माध्यम से होती है। पत्रों के द्वारा हृदय के विभिन्न पटल खुलते हैं। मनुष्य की भावनाओं की स्वाभाविक अभिव्यक्ति पत्राचार से होती है। पत्र के भी कई प्रकार होते हैं, एक विशेष लेखन-शैली होती है, और भी कई सारी ज़रूरी चीजें होती हैं जो आपको एक पत्र लिखते समय ध्यान देने की जरुरत होती है।

Hindi Letter Writing Tips

सबसे पहले हम एक अच्छे पत्र की कुछ विशेषताओं के बारे में बात करते हैं, ताकि आपको पहले ही यह समझ आ सके कि यदि आपको किसी भी कारण पत्र लिखना है तो उसमें क्या-क्या खूबियाँ होनी चाहिए। सरलता, स्पष्टता, संक्षिप्तता और सम्पूर्णता, प्रभावान्विती ये सभी एक अच्छे पत्र की विशेषताएँ कुछ इस प्रकार होती हैं।

  • पत्र को सरल भाषा में लिखा जाना चाहिए। बनावटी भाषा और क्लिष्ट भाषा का प्रयोग करना अच्छा नहीं है।
  • सारी बातें सीधे-सादे से स्पष्ट लिखनी चाहिए। विचार जितने स्पष्ट रहेंगे, उतने पढ़ने और समझने में पत्र अच्छे लगेंगे।
  • पत्र अपने में सम्पूर्ण और संक्षिप्त होना चाहिए। पत्र अधिक लम्बा नहीं होना चाहिए, और बार-बार एक ही बात को दुहराना नहीं चाहिए।
  • पत्र का पूरा प्रभाव पाठक पर पढ़ना चाहिए। इसमें नम्रता और भद्रत का भाव अपेक्षित है।
  • लिखावट सुंदर और साफ हो, विराम आदि चिन्हों का सही प्रयोग हो, शीर्षक, तिथि, अभिवादन ठीक हो और सही स्थान पर हो।

पत्र-लेखन का महत्त्व

पत्र-लेखन भावों तथा विचारों के आदान-प्रदान करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। पत्र का लेखक जहाँ अपना संदेश पत्र के माध्यम से भेजता है, वहीं अपनी इच्छाएँ तथा आवश्यकताएँ उपयुक्त व्यक्ति तक पहुँच भी देता है।

पत्र में लेखक के व्यक्तित्व की छाप होती है। विशेष रूप से व्यक्तिगत पत्रों को पढ़कर आप किसी भी व्यक्ति के अच्छे-बुरे स्वभाव और मनोवृत्ति का परिचय आसानी से पा सकते हैं। पत्र एक पुल के समान है, जो दूर बैठे व्यक्तियों को एक-दूसरे से मिलाने में सहायक होता है।

पत्र-लेखन ऐसी कला है, जिसका हमारे जीवन में प्रायः उपयोग होता है। जहाँ बचपन में हम संबंधियों या मित्रों को पत्र लिखते हैं, वहीं बड़े होने पर यह क्षेत्र अधिक विस्तृत हो जाता है। आजकल हम कार्यालय और व्यवसाय संबंधी पत्र भी अधिक लिखने लगे हैं।

छोटी अवस्था में लिखे गए पत्रों में भावुकता का अंश अधिक होता है। धीरे-धीरे विचारों में प्रौढ़ता आने के साथ-साथ पत्रों की भाषा और शैली में निखार आने लगता है। अच्छा पत्र वही है जिसे पढ़कर लिखी हुई बात सरलतापूर्वक समझ में आ जाए।

व्यापारी एक-दूसरे को अपने व्यवसाय से संबंधित पत्र लिखते हैं। ग्राहक अनेक जानकरियाँ प्राप्त करने के लिए पत्र लिखते हैं। व्यापारी या दुकानदार को वस्तुओं की खरीद आदि के लिए ग्राहक भी पत्र लिखते हैं। कार्यालयी ढाँचे में अधिकारियों और कर्मचारियों का एक-दूसरे से मिलकर बात करना संभव नहीं होता इसलिए अधिकतर काम पत्रों के माध्यम से ही किए जाते हैं। इन सभी क्षेत्रों में पत्रों का प्रयोजन अलग-अलग होता है इसलिए ये पत्र अपने स्वरूप में भी एक-दूसरे से भिन्न होते हैं।

इसी के साथ पत्र-लेखन का जो अभी तक प्रचलित उदाहरण है, स्कूल से छुट्टी लेने के लिए प्रार्थना-पत्र

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पत्र के प्रकार: अनौपचारिक तथा औपचारिक पत्र

पत्र दो प्रकार के होते हैं, अनौपचारिक और औपचारिक।

  • अनौपचारिक पत्रों में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, आदि पत्र आ जाते हैं।
  • औपचारिक पत्रों में व्यवसाय अथवा सरकारी कार्यालयों से संबंधित पत्र आ जाते हैं।
  • इस प्रकार मुख्यतः पत्रों के चार प्रकार होते हैं; व्यक्तिगत, सामाजिक, व्यावसायिक एवं सरकारी पत्र।

व्यक्तिगत पत्र क्या होता है?

ऐसे पत्र, जो माता-पिता, भई-बहन अथवा किसी अन्य प्रियजन मित्र को लिखे जाते हैं, व्यक्तिगत पत्र कहलाते हैं।

सामाजिक पत्र क्या होता है?

सामाजिक स्तर पर विवाह, मृत्यु, जन्म-दिवस, गृह-प्रवेश आदि के मांगलिक अथवा संस्कार-उत्सव पर लोगों को आमंत्रित करने के लिए जो पत्र लिखे अथवा छपवाए जाते हैं, वे सामाजिक पत्र कहलाते हैं।

व्यावसायिक पत्र क्या है?

किसी व्यवसायी द्वारा अपने व्यवसाय के सम्बंध में दूसरे व्यापारियों, दुकानदारों, ग्राहकों, कारख़ानेदारों अथवा फ़र्मों को जो पत्र लिखे जाते हैं, वे व्यावसायिक अथवा व्यापारिक पत्र कहलाते हैं।

सरकारी पत्र क्या होता है?

जो पत्र सरकारी कार्यालयों द्वारा अन्य सरकारी कार्यालयों, विभागों, व्यक्तियों को लिखे जाते हैं, वे सरकारी पत्र कहलाते हैं।

Hindi Letter Writing: पत्र लिखने का तरीक़ा

औपचारिक तथा अनौपचारिक पत्रों के कई अंग होते हैं, जो पत्र-लेखन के समय ध्यान में रखने होते हैं तभी आपका पत्र अच्छा बनेगा।

प्रेषक का पता एवं तिथि

पत्र के प्रारम्भ में लेखक को पत्र के दायीं ओर ऊपर का पता अंकित करना चाहिए। पाते के ऊपर लेखक का नाम भी लिखा रहना चाहिए। पते के ठीक नीचे पत्र लिखने की तिथि भी अंकित होनी चाहिए।

सम्बोधन

पता तथा तिथि लिखने के पश्चात लेखक जिस व्यक्ति अथवा संबंधी को पत्र लिख रहा है, उसे सम्बोधित करना चाहिए। यह संबोधन कागज के बाईं ओर पते के नीचे लिखा रहना चाहिए। संबोधन व्यक्ति तथा संबंधों की प्रगाढ़ता के आधार पर होना चाहिए।

बड़ों को पत्र लिखते समय आदरणीय, सम्मान्य, माननीय, पूजनीय, वंदनीय, पूज्य, श्रद्धेय, आदि लिखना चाहिए। समवयस्कों को प्रिय, बंधु, बंधुवर, मित्रवर, स्नेहिल आदि तथा छोटों को प्रिय, स्नेहिल, आयुष्मान, मेरे प्यारे आदि लिखना चाहिए।

अभिवादन

यद्यपि आज धीरे-धीरे पत्रों में अभिवादन लिखने की परम्परा समाप्त होती जा रही है, किंतु व्यक्तिगत पत्रों में अभिवादन करना हमारे सहज प्रेम-सम्मान की अभिव्यक्ति के लिए अनिवार्य है। इसलिए अभिवादन हो तो अच्छा है।

अभिवादन भी व्यक्ति और संबंधों के अनुसार बदल जाना चाहिए। जैसे- बड़ों के लिए सादर प्रणाम, चरण स्पर्श, नमस्कार आदि। समवयस्कों के लिए सप्रेम नमस्ते, प्रेम आदि तथा छोटों के लिए स्नेह, प्यार, प्रेम, सुखी रहो, चिरंजीवी रहो आदि लिखना चाहिए।

मुख्य विषय

पत्र का वास्तविक कथ्य ही मुख्य विषय होता है। हमें अपने विषय को रोचक, सरस शैली में स्पष्ट ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए। यदि विषय लम्बा है और विचार के बिंदु अधिक हैं, तो उन्हें विभिन्न अनुच्छेदों में बाँटकर लिखा जाना चाहिए। मुख्य विषय के प्रतिपादन में वे सभी गुण होने चाहिए, जिनका उल्लेख एक श्रेष्ठ पत्र के गव में किया गया है।

उपसंहार

वर्ण्य विषय पूर्ण हो जाने पर पत्र के अंत में दायीं ओर लेखक को अपना नाम तथा पत्र-प्राप्तकर्त्ता के साथ अपना सम्बंध सम्बोधित करना चाहिए।

हिंदी पत्र-लेखन के उदाहरण

Hindi letter writing tips अभी तक जो भी इस लेख में बताए गए हैं, मुझे आशा है कि आपको अच्छे-से समझ में आ गए होंगे। अब हम अनौपचारिक और औपचारिक पत्रों के कुछ उदाहरण देखते हैं, जिससे आप थोड़ा-सा idea ले सकते हैं कि पत्र-लेखन की प्रक्रिया आखिर होती कैसी है?

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