नीति निर्देशक तत्व क्या है? मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व में अंतर: मौलिक अधिकार किसे कहते हैं?

मौलिक अधिकार, वे अधिकार है जो नागरिकों के व्यक्तित्त्व विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं. इसका वर्णन भारतीय संविधान के भाग 3 में है. और नीति निर्देशक तत्व संविधान के भाग 4 में वर्णित है. नीति निर्देशक तत्व से आशय संविधान द्वारा राज्य को दिया गया निर्देश है. राज्य किस प्रकार के तत्वों पर अपनी नीतियों का निर्धारण करेगा, इसका वर्णन नीति निर्देशक सिद्धांत में है. तो आज हम आपसे Maulik Adhikar aur Niti Nirdeshak tatv me Antar के बारे में बात करेंगे.

राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत राष्ट्र निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है और मौलिक अधिकार नागरिकों के व्यक्तित्त्व विकास के महत्वपूर्ण है. नागरिकों को उनके सम्पूर्ण विकास के लिए मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है. जबकि नीति निर्देशक तत्व राष्ट्र निर्माण के लागु किया गया है.

मौलिक अधिकार क्या है? 

मौलिक अधिकार वे मूलभूत अधिकार होते हैं, जिनके बिना व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास नहीं हो सकता है. ये अधिकार व्यक्ति के जीवन के चहुमुखी विकास के लिए संविधान द्वारा नागरिकों को प्राप्त है. भारतीय संविधान के भाग 3 में (अनुच्छेद 14 से 32 तक) छः मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है. समता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा का अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार. ये ऐसे अधिकार हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिये आवश्यक हैं, जिनके बिना मनुष्य का सम्पूर्ण विकास नहीं हो सकता.

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व क्या है?

भारतीय संविधान के भाग 4 (अनुच्छेद 38 से 51) में राज्य के नीति निर्देशक तत्व का वर्णन है. किसी राष्ट्र के निर्माण में नीति-निर्देशक तत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. संविधान कुछ राज्‍य के नीति निर्देशक तत्‍व निर्धारित करता है, यद्यपि ये न्‍यायालय में कानूनन न्‍यायोचित नहीं ठहराए जा सकते,परन्‍तु देश के शासन के लिए नीति-निर्देशक तत्व मौलिक हैं. कानून बनाने में इन सिद्धान्‍तों को लागू करना राज्‍य का कर्तव्‍य होता है. सबसे पहले राज्य के नीति-निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान मे लागू किया गया था. राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का कार्य एक जनकल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है.

मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्व में अंतर 

                                मौलिक अधिकार                               नीति निर्देशक तत्व
1 मौलिक अधिकार भारतीय संविधान के भाग-3 (अनुच्छेद 18 से 32) में वर्णित है. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व का वर्णन भारतीय संविधान के भाग- 4 (अनुच्छेद 38 से 51) में है.
2 सबसे पहले संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में मौलिक अधिकार का वर्णन किया गया था. मौलिक अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है. नीति-निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान से लिया गया है.

 

3 यह नागरिकों के व्यक्तित्व विकास या नागरिकों के अधिकार के लिए महत्वपूर्ण है. मौलिक अधिकार सरकार के महत्त्व को घटाता है. यह राष्ट्र निर्माण या समाज के लिए महत्वपूर्ण है. नीति निर्देशक तत्व सरकार के अधिकारों को बढाता है.
4 इसे लागू करने, प्राप्त करने या इसकी रक्षा के लिए न्यायालय की शरण ले सकते हैं. इसे लागू करने के लिए न्यायालय की शरण नहीं ले सकते हैं. यानि इसे वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है.
5 मूल अधिकार या मौलिक अधिकार क़ानूनी अधिकार है. इसके पीछे क़ानूनी मान्यता है. यह राजनीतिक अधिकार है, इसके पीछे राजनीतिक मान्यता है.
6 मौलिक अधिकार नागरिकों को जन्म के उपरांत स्वत: प्राप्त हो जाता है. यह नागरिकों का व्यक्तिगत अधिकार है. नीति निर्देशक तत्व राज्य सरकार के द्वारा लागु करने के बाद ही नागरिक को प्राप्त होता है. यह राज्य के नागरिकों के प्रति दायित्व है और लोकनीति का मूल आधार है.

इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है. 

1 thought on “नीति निर्देशक तत्व क्या है? मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व में अंतर: मौलिक अधिकार किसे कहते हैं?”

Leave a Comment

error: Content is protected !!