होली क्यों मनाई जाती है? 10 Lines on Holi in Hindi होली निबंध

रंगों का त्योहार होली का सभी लोगों को बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें सभी लोग आपस में घुल-मिलकर आनंद लेते हैं, रंग-अबीर लगाते हैं और भारत देश के अलावा परदेश में भी मनाया जाता है। तो आज हम इसी के बारे में बात करेंगे कि Holi Kyo Manai Jati Hai?

होली का महत्त्व 10 Lines on Holi Essay in Hindi इसके बारे में कई बार स्कूल/कॉलेज में विद्यार्थियों को निबंध लिखने को भी कहा जाता है। तो होली का त्योहार की कहानी के बारे में आप इस लेख को भी लिख सकते हैं।

Holi Kyo Manai Jati Hai?

होली फागुन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह वसंत ऋतु के आने का समय है। वसंत मस्ती का मौसम होता है। फूल खिलने लगते हैं। नई पत्तियाँ निकलने लगती हैं। सब तरफ उल्लास का वातावरण रहता है।

होली के त्योहार से जुड़ी एक कथा है- सतयुग में हिरण्यकशिपु नाम का एक राजा था। वह अपने को भगवान मानता था। अपने राज्य में वह भगवान की पूजा नहीं होने देता था। हिरण्यकशिपु का बेटा प्रह्लाद बचपन से ही भगवान का भक्त था। हिरण्यकशिपु को यह बात बिलल पसंद नहीं थीं। उसने प्रह्लाद को बहुत समझाया, धमकाया भी, पर कोई असर नहीं पड़ा। तब हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को सजा देने की ठानी।

उसने प्रह्लाद को मारने की कई बार कोशिशें कीं, पर भगवान की कृपा से वह हर बार बच गया। अंत में हिरण्यकशिपु ने इस काम में अपनी बहन होलिका की मदद ली। होलिका को वरदान मिला हुआ था कि वह आग से नहीं जलेगी। हिरण्यकशिपु ने अपनी योजना होलिका को बताई। वह तैयार हो गई।

होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई। हिरण्यकशिपु ने सोचा था कि प्रह्लाद जल जाएगा। पर हुआ उल्टा; होलिका तो जल गई, प्रह्लाद बच गया। तभी से होली का त्योहार मनाया जाता है। लोग मिल-जुलकर होलिका का दहन करते हैं। इस तरह से सामूहिक रूप से अन्याय को जला दिया जाता है।

होली का महत्त्व: 10 Lines on Holi in Hindi

होली की सबसे बड़ी विशेषता है- इसका राग-रंग से जुड़ाव। इसमें पूजा-पाठ का इतना उत्साह नहीं है, जितना गाने-बजाने, खाने-पीने और अबीर-गुलाल का।

इस त्योहार की तैयारी काफ़ी समय पहले से होने लगती है। होली के दिन लोग एक-दूसरे पर रंग डालते हैं। फाग गाया जाता है। लो मिल-जुलकर ख़ुशी मनाते हैं। पुराने लड़ाई-झगड़े भूलकर गले मिलते हैं।

ब्रज की होली बहुत मशहूर है। यहाँ बरसाने की लट्ठमार होली देखने के लिए तो दुनिया भर से लोग आते हैं। इसी मौक़े पर पंजाब में ‘होला मोहल्ला’ मनाया जाता है।

ख़ुशी के इस त्योहार में कुछ लोग विष भी घोल देते हैं। लोगों पर कीचड़ डाल देते हैं। कभी-कभी तो तारकोल भी डाल देते हैं। रासायनिक रंग लगाते हैं। इन चीजों से शरीर को नुकसान होता है। कुछ लोग शराब और भाँग आदि पीकर हुड़दंग मचाते हैं। पुरानी रंजिश का बदला होली के मौक़े पर लेते हैं। इससे माहौल बिगड़ता है।

हमें कोशिश करनी चाहिए कि होली सभी के लिए ख़ुशी का त्योहार बना रहे। रासायनिक रंगों का इस्तेमाल न करें। कीचड़ वग़ैरह न डालें। मन से पुराने वैर-भाव मिटा दें।

होली में रंग-अबीर क्यों लगाते हैं?

हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद की कहानी के अतिरिक्त होली के संबंध में भगवान श्रीकृष्ण का भी एक प्रसंग है। यह कहानी भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण के समय तक जाती है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण रंगों से होली मनाते थे, इसलिए होली का त्योहार रंगों के रूप में लोकप्रिय हुआ।वे वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे। वे पूरे गांव में मज़ाक भरी शैतानियां करते थे. आज भी वृंदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं नहीं मनाई जाती। इसके साथ ही अगर आपने कृष्ण-लीला देखा होगा तो आप जानते होंगे कि पूतना नाम की राक्षसी भगवान श्रीकृष्ण को विषयुक्त दूध पिलाने आती है, जिसके कारण ही भगवान श्रीकृष्ण का रंग नीला हो गया है।

जब भगवान श्रीकृष्ण ने यशोदा माँ ने पूछा कि राधा इतनी गोरी और मेरा रंग ऐसा क्यों है? तो यशोदा माँ ने भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि आप राधा को जिस रंग से रंगना चाहते हैं, रंग सकते हैं। और यही कारण है कि धीरे-धीरे यह एक संस्कृति बन गई और अंततः एक त्यौहार, जिसमें हम रंग खेलते हैं।

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