राष्ट्रीय एकता पर निबंध 500+ Words Essay on National Unity in Hindi

राष्ट्रीय एकता का मतलब है सम्पूर्ण भारत को एकता एवं अखंडता के सूत्र में बांधे रखना। जब तक राष्ट्र के सभी नागरिक एक नहीं होंगे, तब तक देश का सम्पूर्ण विकास नहीं हो सकता है। और भारत तो विभिन्नता में एकता (unity in diversity) दर्शाती है, इसलिए हमारे लिए राष्ट्रीय एकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

राष्ट्रीय एकता पर निबंध

हमारा देश विश्व के मानचित्र पर एक विशाल देश के रूप में चित्रित है। प्राकृतिक रचना के आधार पर तो भारत के कई अलग-अलग रूप और भाग हैं। उत्तर का पर्वतीय भाग, गंगा-यमुना सहित अन्य नदियों का समतलीय भाग, दक्षिण का पठारी भाग और समुद्र तटीय मैदान।

भारत का एक भाग दूसरे भाग से अलग-थलग पड़ा हुआ है। नदियों और पर्वतों के कारण वे भाग एक-दूसरे से मिल नहीं पाते हैं। इसी प्रकार से जलवायु की विभिन्नता और अलग-अलग क्षेत्रों के निवासियों के जीवन -आचरण के कारण भी देश का स्वरूप एक-दूसरे से विभिन्न और पृथक् पड़ा हुआ दिखाई देता है। इन विभिन्नताओं के होते हुए भी भारत एक है।

भारतवर्ष की निर्माण सीमा ऐतिहासिक है । वह इतिहास की दृष्टि से अभिन्न है। इस विषय में हम जानते हैं कि चन्द्रगुप्त, अशोक, विक्रमादित्य और उनके बाद मुगलों ने भी इस बात की यही कोशिश की थी कि किसी तरह सारा देश एक शासक के अधीन लाया जा सके। उन्हें इस कार्य में कुछ सफलता भी मिली थी ।

इस प्रकार भारत की एकता ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही सिद्ध होती है। हमारे देश की एकता का एक बड़ा आधार दर्शन और साहित्य है। हमारे देश का दर्शन सभी प्रकार की भिन्नताओं और असमानताओं को समाप्त करने वाला है। यह दर्शन है- सर्वसमन्वय की भावना का पोषक। यह दर्शन किसी एक भाषा में नहीं लिखा गया है, बल्कि यह देश की विभिन्न भाषाओं में लिखा गया है।

National Unity Essay in Hindi

इसी प्रकार से हमारे देश का साहित्य विभिन्न क्षेत्र के निवासियों के द्वारा लिखे जाने पर भी क्षेत्रवादिता या प्रांतीयता के भावों को नहीं उत्पन्न करता है, बल्कि सबके लिए भाई-चारे और सद्भाव की कथा सुनाता है। मेल-मिलाप का सन्देश देता हुआ देशभक्ति के भावों को जगाता है।

विचारों की एकता जाति की सबसे बड़ी एकता होती है। अतएव भारतीय जनता की एकता के असली आधार भारतीय दर्शन और साहित्य है जो अनेक भाषाओं में लिखे जाने पर भी अन्त में जाकर एक ही साबित होते हैं । यह भी ध्यान देने की बात है कि फारसी लिपि को छोड़ दें, तो भारत की अन्य सभी लिपियों की वर्णमाला एक ही है ।

यद्यपि हमारे देश की भाषा एक ही नहीं अनेक हैं । यहाँ पर लगभग पन्द्रह भाषाएँ हैं। इन सभी भाषाओं की बोलियाँ अर्थात् उपभाषाएँ भी हैं। सभी भाषाओं को संविधान से मान्यता मिली है। इन सभी भाषाओं से रचा हुआ साहित्य हमारी राष्ट्रीय भावनाओं से ही प्रेरित है। इस प्रकार से भाषा-भेद की भी ऐसी कोई समस्या नहीं दिखाई देती है, जो हमारी राष्ट्रीय एकता को खंडित कर सके।

उत्तर भारत का निवासी दक्षिणी भारत के निवासी की भाषा को न समझने के बावजूद उसके प्रति कोई नफरत की भावना नहीं रखता है। रामायण, महाभारत आदि ग्रंथ हमारे देश की विभिन्न भाषाओं में तो हैं, लेकिन इनकी व्यक्त हुई भावना हमारी राष्ट्रीयता को ही प्रकाशित करती हैं।

तुलसी, सूर, कबीर, मीरा, नानक, रैदास, तुकाराम, विद्यापति, रवीन्द्रनाथ टैगोर, तिरूवलुवर आदि की रचनाएँ एक-दूसरे की भाषा से नहीं मिलती हैं। फिर भी इनकी भावात्मक एकता राष्ट्र के सांस्कृतिक मानस को ही पल्लवित करने में लगी हुई हैं।

भारत की एकता की सबसे बड़ी बाधा ही ऊँचे-ऊँचे पर्वत, बड़ी-बड़ी नदियाँ देश का विशाल क्षेत्रफल आदि । जनता इन्हें पार करने में असफल हो जाती थी। इससे एक-दूसरे से सम्पर्क नहीं कर पाते थे। आज की वैज्ञानिक सुविधाओं के कारण अब वह बाधा समाप्त हो गई हैं। देश के सभी भाग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इस प्रकार हमारी एकता बनी हुई है।

हमारे देश की एकता का सबसे बड़ा आधार प्रशासन की एकसूत्रता है। हमारे देश का प्रशासन एक है। हमारा संविधान एक है और हम दिल्ली में बैठे-बैठे ही पूरे देश पर शासन एक समान करने में समर्थ हैं। राष्ट्रीय एकता समय की पुकार है। सभी देशवासियों का यह कर्तव्य है कि वे राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व का पालन करें और राष्ट्रीय एकता (national unity) बढ़ाने में अपना योगदान दें।

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