राजभाषा के रूप में हिंदी की स्थिति पर विचार कीजिए।

राजभाषा के नाम से ही आपको मालूम पड़ रहा होगा कि यह राज्य की भाषा होगी। साहित्यिक अन्दाज़ में कहें तो राजभाषा उस भाषा को कहते हैं जो राजकाज में प्रयोग किया जाता हो। और आज हम राजभाषा के रूप में हिंदी की स्थिति के बारे में विस्तार से बात करेंगे।

किसी क्षेत्र विशेष के लिए अलग-अलग राजभाषा हो सकती हैं, लेकिन राष्ट्रभाषा पूरे देश में एक ही होती है। और हिंदी राष्ट्रभाषा है या राजभाषा इसके बारे में कई विचार हैं, वैसे आपको बता दें कि भारत के संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है लेकिन राष्ट्रभाषा का उसमें कहीं भी उल्लेख नहीं है।

राजभाषा के रूप में हिंदी की स्थिति क्या है?

कोई भी भाषा जितने विषयों में प्रयुक्त होती जाती है, उसके उतने ही अलग-अलग रूप भी विकसित होते जाते हैं। हिंदी के साथ भी यही हुआ हैं। पहले वह केवल बोलचाल की भाषा थी। तो उसका एक बोलचाल का ही रूप था, फिर वह साहित्यिक भाषा बनी तो उसका एक साहित्यिक रूप भी विकसित हो गया।

समाचार-पत्रों में ‘पत्रकारिता हिंदी’ का रूप उभर कर आया। वैसे ही ‘खेलकूद की हिंदी’, ‘बाज़ार की हिंदी’ का रूप सामने आई। स्वतंत्रता के बाद हिंदी भारत की राजभाषा घोषित की गई तथा उसका प्रयोग न्यूनाधिक रूप में कार्यालयों में होने लगा तो क्रमशः उसका एक राजभाषा रूप विकसित हो गया।

राजभाषा किसे कहते हैं?

सामान्यतया ‘राजभाषा’ भाषा के उस रूप को कहते हैं, जो राजकाज में प्रयुक्त होता है। भारत की आजादी के बाद एक राजभाषा आयोग की स्थापना की गई थी। उसी आयोग ने यह निर्णय लिया कि हिंदी को भारत की राजभाषा बनायी जाए।

तदनुसार संविधान में इसे राजभाषा घोषित किया गया था। प्रादेशिक प्रशासन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड राजभाषा हिंदी का प्रयोग कर रहे हैं। साथ ही दिल्ली में भी इसका प्रयोग हो रहा है और केंद्रीय सरकार भी अपने अनेकानेक कार्यों में इनके प्रयोग को बढ़ावा दे रही है।

राजभाषा हिंदी की विशेषताएँ

  • साहित्यिक हिंदी में जहाँ अमिधा, लक्षणा और व्यंजना के माध्यम से अभिव्यक्ति की जाती है, राजभाषा हिंदी में केवल अमिधा का ही प्रयोग होता है।
  • साहित्यिक हिंदी एकाधिकार्थता- चाहे शब्द के स्तर पर हो चाहे वाक्य के स्तर पर, काव्य-सौंदर्य के अनुकूल मानी जाती है। इसके विपरीत राजभाषा हिंदी में सदैव एकार्थता ही काम्य होती है।
  • राजभाषा अपने पारिभाषिक शब्दों में भी हिंदी की अन्य प्रयुक्तियों से पूर्णतः भिन्न हैं। इसके अधिकांश शब्द प्रायः कार्यालयी प्रयोगों के लिए ही उसके अपने अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। जैसे: आयुक्त – Commissioner, निविदा – Tender, प्रशासकी – Administrative, मंत्रालय- Ministry, आदि।

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