मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध: मेरे प्रिय उपन्यासकार/लेखक मुंशी प्रेमचंद की ‘गोदान’

कौन सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है या श्रेष्ठ साहित्यकारों में से कौन सर्वश्रेष्ठ साहित्यकार हैं? यह प्रश्न बिलकुल बेमानी है। हाँ, इन श्रेष्ठ साहित्यकारों में से किनसे आप सर्वाधिक प्रभावित हैं, इस प्रश्न का उत्तर दिया जा सकता है। एक ग्रामीण परिवेश से संबंध रखने के नाते मेरा झुकाव मुंशी प्रेमचंद के प्रति रहा है। प्रेमचंद ने जनसाधारण और ग्रामीण जीवन के प्रति जिस प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है वह आज भी हिन्दी साहित्य को अनुप्राणित कर रहा है।

मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध

प्रेमचंद ने कहानी और उपन्यास दोनों लिखे हैं। उनकी कहानियों का संकलन ‘मानसरोवर के आठ भागों में किया गया है। उनकी प्रमुख कहानियाँ ‘पंच परमेश्व’, ‘ईदगाह’, ‘ठाकुर का कुँआ’, ‘पूस की रात’, ‘कफन’ आदि हैं। उनके प्रमुख उपन्यासों में – ‘गोदान’, ‘रंगभूमि’, ‘सेवासदन‘, ‘प्रेमाश्रम, आदि हैं।

मेरा प्रिय उपन्यास ‘गोदान’ है जिसकी रचना ‘उपन्यास सम्राट‘ और ‘कलम जादूगर’ मुंशी प्रेमचन्द ने की थी। यह उपन्यास 1936 ई. में प्रकाशित हुआ था। इसे प्रेमचन्द का आखिरी उपन्यास माना जाता है। इस उपन्यास में प्रेमचन्द ने गाँवों की आर्थिक दुर्दशा, जाति व्यवस्था के दोषों, किसानों की दरिद्रता तथा इसबों का शहरी जीवन से तादात्म्य को अभिव्यक्ति प्रदान किया है। ‘गोदान’ न सिर्फ प्रेमचन्द की सर्वश्रेष्ठ कृति है, बल्कि हिन्दी साहित्य का एक गौरव ग्रन्थ भी है।

‘गोदान’ को विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में स्थान प्राप्त है। आजादी के पूर्व ग्रामीण संस्कृति को मुखरित करता हुआ यह उपन्यास आज भी पूर्ण रूप से प्रासंगिक है। ‘गोदान’ की कथावस्तु गाँव और कृषक संस्कृति है। ‘गोदान’ कृषि व्यवस्था के करुण अवसान की मार्मिक अभिव्यक्ति है। इसके मूल औद्योगिक संस्कृति तथा अंग्रेजों का प्रभुत्व मुख्य रूप से रहा है। किसान, मजदूर बनने को विवश हो गया. जमींदारों, महाजनों तथा उसकी स्वयं की आवश्यकताओं ने उसे विपन्न कर दिया।

‘गोदान’ के सभी पात्र अपनी परिस्थितियों के जीवन्त उदाहरण हैं। उपन्यास अत्यंत करुणापूर्ण भाषा में रचित हैं तथा प्रेमचन्द ने अपने पात्रों के माध्यम से तत्कालीन परिस्थितियों का मार्मिक चित्रण किया है। उपन्यास में गोबर का खेती छोड़कर शहर में मजदूरी करना एक नये युग की शुरुआत का संकेत है।

गोदान की शिल्प-कला, अद्वितीय है, इसमें कथ्य का यथार्थपूर्ण चित्रण किया है, इसकी शैली सहज है तथा यह उपन्यास साहित्यिक कृति के दृष्टिकोण से आकांक्षाओं और संवेदनाओं के अनुरूप है तथा यही कारण है कि यह उपन्यास मुझे अत्यधिक प्रिय है।

प्रेमचंद की कहानियों व उपन्यासों दोनों के पात्र गाँव के किसान और मजदूर हैं। जमींदार और महाजन का किसानों व मजदूरों पर संयुक्त प्रहार इनकी कृतियों का प्रमुख विषय रहा है। एक कहानीकार तथा एक उपन्यासकार दोनों के रूप में प्रेमचंद ने साहित्य की अद्वितीय सेवा की है। उनकी कृतियाँ विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित हैं तथा आज भी उनकी रचनाएँ वर्तमान लेखकों के लिए प्रेरणा के स्रोत व सफलता के मूलमंत्र हैं।

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